Wednesday, 28 November 2018

श्रीभगवत गीता का श्लोक

You have a right to “Karma” (actions) but never to any Fruits thereof. You should never be motivated by the results of your actions, nor should there be any attachment in not doing your prescribed activities.
तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फल में नहीं ।
इसलिए तू कर्म फल में हेतु रखने वाला मत हो,
तथा तेरी अकर्म में (कर्म न करने में) भी आसक्ति न हो । 

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