Sunday, 8 December 2024

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2024 में हिमाचल प्रदेश का नाटी पारंपरिक गीत और नृत्य ने महोत्सव के मंच पर एक खास छाप छोड़ी।

यह नृत्य और गीत हिमाचल की पहाड़ी संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन का जीवंत प्रतीक हैं।

नाटी एक पारंपरिक हिमाचली नृत्य है, जिसे विशेष रूप से शादी और त्योहारों जैसे अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता है। इस नृत्य में कलाकारों की तेज़-तर्रार और जीवंत मुद्राएँ, ताल और संगीत के साथ गहरी सांस्कृतिक जड़ों को प्रस्तुत करती हैं। नाटी नृत्य के दौरान, कलाकार हाथों की ताल से ताल मिलाते हैं और शरीर की लहराती हुई हरकतें पर्वतीय जीवन की खुशी, उत्सव और सामूहिक आनंद का प्रतीक होती हैं।

इसके साथ ही, नाटी पारंपरिक गीत भी इस नृत्य का अभिन्न हिस्सा होते हैं। ये गीत आमतौर पर लोक जीवन, प्रेम, प्रकृति और देवताओं की पूजा से जुड़े होते हैं। हिमाचल के इन पारंपरिक गीतों में एक विशेष प्रकार की सरलता और मीठास होती है, जो दर्शकों को एक अलग ही अहसास कराती है।

“हिमाचल की शुद्धता, पहाड़ी संस्कृति की पहचान”

इस महोत्सव के दौरान, नाटी नृत्य और गीत ने न केवल हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत किया, बल्कि इसे पूरी दुनिया के सामने भी जीवंत किया।

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